Sadaneera 17th Issue

नया अंक
शरद  2017

नए संपादन में नए रूप-विधान के साथ यह ‘सदानीरा’ का पहला यों 17वां अंक है. या त्रा एं इसकी थीम है. लेकिन यात्राएं यहां स्थूल अर्थों में नहीं हैं. इस अंक में प्रस्तुत सृजन में पढ़ने वालों को एक यात्रायुक्त उन्मुक्तता नजर आएगी— यह यकीन है. कुछ कमियां और खालीपन भी नजर आ सकता है. इसे हमें धीरे-धीरे अगले अंकों में दूर करना है. फिलहाल यहां एक खब्त है— दीवानगी में उठे हुए कुछ कदम. यह हमारी तड़प की एक झलक है बस, इस आकांक्षा में अभी बहुत कुछ होने को है. हिंदी में मौजूद बेशर्म पारस्परिकता, सतही सांस्थानिकता, भ्रष्ट अकादमिकता और मठाचार्यों से सख्त परहेज के बावजूद हमें न सहयोग की कमी है, न समर्थन की. ‘सदानीरा’ की गंभीरता, विविधता और व्यापकता के सिलसिले में हमारी प्रतिबद्धता बहुत स्पष्ट है. नई प्रतिभाओं के साथ हम युगों से जारी नींद तोड़ने के लिए बेताब हैं…

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