रियानो गिडन्स का एक गीत ::
अनुवाद और प्रस्तुति : यादवेंद्र

Rhiannon Giddens song
Rhiannon Giddens by David McClister

अमेरिकी लोकगायक रियानो गिडन्स ने अमेरिका की काली गुलामी के इतिहास को बड़ी गहराई से पढ़ा है. ‘‘इतिहास मेरा सबसे बड़ा शिक्षक है…’’ वह अक्सर कहती भी हैं. वह ग्रैमी पुरस्कार सहित कई सम्मानों से नवाजी गई हैं. अत्यंत प्रतिष्ठित TED लेक्चर देते हुए उनका सूत्र वाक्य था, ‘‘गीत इतिहास को जीवन प्रदान करते हैं.’’ क्लैसिकल संगीत में प्रशिक्षित गिडन्स ‘कैरोलिना चॉकलेट ड्रॉप्स बैंड’ की लीड गायक और गीतकार रही हैं. वॉयलिन और बैंजो उनके प्रिय वाद्य हैं. अमेरिका के निर्माण में ब्लैक लोगों के योगदान के अपने अध्ययन के दौरान उन्हें मालूम हुआ कि यूरोप से आकर बसे गोरों के सत्ता पर काबिज होने से पहले तक बैंजो मूलतः काले लोगों के लोकगीतों और लोकनृत्य का मुख्य वाद्य था, सो उन्होंने प्रतिरोध के प्रतीक-स्वरूप बैंजो को अपना प्रिय वाद्य बना लिया. गिडन्स नंगे पांव अपनी परफॉर्मेंस देती हैं. ‘‘नंगे पांव होना मेरे लिए जमीन से जुड़े होना है, किसी दूसरे तरीके से मैं इस तरह जमीन से जुड़ी नहीं रह सकती.’’ अपनी बातचीत में वह अक्सर उन शोधपरक किताबों का हवाला देती हैं, जो अमेरिका के रंगभेदी विभाजन और दमन की प्रामाणिक दस्तावेज मानी जाती हैं. गिडन्स के अनेक लोकप्रिय गीत इन्हीं ऐतिहासिक संदर्भों पर आधारित हैं.

वह कहती हैं, ‘‘मेरे प्रतिरोध संगीत का स्वर उपदेशात्मक नहीं है. मैं श्रोताओं से बात नहीं करती बल्कि वास्तविक कहानियां सुनाती हूं. उन आवाजों को सुनने का जरिया बनती हूं, जिन्हें अवाम तक पहुंचने नहीं दिया गया. प्रतिरोध संगीत का यह ऐसा पक्ष है, जो कई बार अनसुना और उपेक्षित रह जाता है.”

रियानो गिडन्स ने अपने अध्ययन के दौरान अठारहवीं सदी का एक अखबारी विज्ञापन देखा, जिसमें लिखा था, ‘‘बिक्री के लिए उपलब्ध है— एक अत्यंत स्मार्ट स्वस्थ नीग्रो युवती (वेंच शब्द जिसको वेश्यावृत्ति के संदर्भ में ज्यादा प्रयोग किया जाता है), उम्र लगभग बाईस वर्ष जिससे घर का कामकाज और खेत का काम दोनों कराया जा सकता है. उसके नौ महीने का बच्चा है जिसे उससे लेकर अलग रखा जाएगा और खरीददार की मर्जी वह उसे जैसे और जिसे चाहे बेच सकता है.’’

इस विज्ञापन ने रियानो गिडन्स को गहरे रूप से प्रभावित किया और उन्होंने उससे द्रवित होकर ‘ऐट द पर्चेजर्स ऑप्शन’ गीत लिखा जो उनके ‘फ्रीडम हाईवे’ एलबम में शामिल है और अत्यंत लोकप्रिय है. वह कहती हैं कि गुलामी के दिनों में पीड़ित अपने अनुभवों को लिख नहीं सकते थे, अन्यथा मारे जाते. ऐतिहासिक दस्तावेजों में दर्ज साक्ष्यों के आधार पर मैं एक काल्पनिक पाठ (इमेजिनरी एक्सरसाइज) तैयार करने की कोशिश करती हूं कि अगर वे अपने बयान लिख पाते तो क्या कहते? ‘ऐट द पर्चेजर्स ऑप्शन’ इसका एक ज्वलंत उदाहरण है. बड़ी साफगोई के साथ यह दिखाता है कि गुलामी परिवारों को कैसे तोड़ डालती थी. इस गीत का भावानुवाद यहां प्रस्तुत है :

मेरा एक नन्हा-सा बच्चा है पर क्या मैं उसे साथ रख पाऊंगी
एक दिन ऐसा आएगा जब रोते-रोते मर जाऊंगी
पर ऐसा कैसे होगा कि उससे प्यार न करूं मैं
और उस नन्हे को छाती से न लगाऊं मैं

तुम ले लो मेरा शरीर
तुम ले लो मेरी हड्डियां
तुम ले लो मेरा लहू
पर ले नहीं पाओगे कभी मेरी आत्मा!
तुम ले लो मेरा शरीर
तुम ले लो मेरी हड्डियां
तुम ले लो मेरा लहू
पर ले नहीं पाओगे कभी मेरी आत्मा!

मेरा शरीर काला और चमकीला है
मैं भी जवान थी पर ज्यादा दिनों तक वैसी नहीं रही
तुम मुझे बिस्तर पर खींच ले गए जब मैं बच्ची थी
और फिर छोड़ दिया लाकर औरतों की दुनिया में

तुम ले लो मेरा शरीर
तुम ले लो मेरी हड्डियां
तुम ले लो मेरा लहू
पर ले नहीं पाओगे कभी मेरी आत्मा!
तुम ले लो मेरा शरीर
तुम ले लो मेरी हड्डियां
तुम ले लो मेरा लहू
पर ले नहीं पाओगे कभी मेरी आत्मा!

हर दिन बिला नागा मैं काम में जुटी रही
हर मिनट ओवरटाइम करती रही
चुस्त चपल चलती उंगलियां तेज-तेज
मेरी लहूलुहान उंगलियां भरती रहीं तुम्हारी तिजोरियां

तुम ले लो मेरा शरीर
तुम ले लो मेरी हड्डियां
तुम ले लो मेरा लहू
पर ले नहीं पाओगे कभी मेरी आत्मा!
तुम ले लो मेरा शरीर
तुम ले लो मेरी हड्डियां
तुम ले लो मेरा लहू
पर ले नहीं पाओगे कभी मेरी आत्मा!

मेरा एक नन्हा-सा बच्चा है पर क्या मैं उसे साथ रख पाऊंगी

*

इस गीत को मूल रूप में यहां सुन सकते हैं :

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[ यादवेंद्र सुपरिचित अनुवादक हैं. ‘सदानीरा’ के अन्यतम सहयोगी हैं. पटना में रहते हैं. उनसे yapandey@gmail.com पर बात की जा सकती है.]

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