वे सिर्फ उतना जख्मी करेंगे तुम्हें जितना जरूरी है

कालपेट्टा नारायणन की चार कविताएं :: मलयालम से अनुवाद : बाबू रामचंद्रन

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औरत के व्यर्थ गए अपराधों के बारे में

चार कविताएं :: अनुराधा सिंह

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एक पत्थर किसी का नहीं होता

रसेल एडसन की तीन कविताएं :: अनुवाद : प्रचण्ड प्रवीर

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इन दिनों उदासी कोई हीर है

सात कविताएं :: सुधांशु फ़िरदौस

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उस दिन के लिए जो कभी नहीं आता

निकानोर पार्रा की एक कविता :: अनुवाद : प्रचण्ड प्रवीर

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मैं पानी और आग नहीं बनना चाहती

पोलिना बर्स्कोवा की दो कविताएं :: अनुवाद और प्रस्तुति : विपिन चौधरी

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