वक्तव्य ::
कर्ट वोनेगट
अँग्रेज़ी से अनुवाद : सौरभ राय

american writer kurt vonnegut
कर्ट वोनेगट

मैंने तकनीकी शिक्षा ग्रहण की है। लेकिन जब भी मैं फैकल्टी का हिस्सा रहा हूँ, मैंने अँग्रेज़ी विभाग में काम किया है। हालाँकि मैंने ख़ुद अँग्रेज़ी में मेजर नहीं किया है, लेकिन मेरी पुरज़ोर कोशिश रही है कि साहित्यिक आलोचना में वैज्ञानिक सोच लाई जाए, और इसके लिए बहुत कम लोगों ने मेरा आभार व्यक्त किया है।

कोई बात नहीं। वैसे कहानियों के बहुत ही साधारण आकार होते हैं, जिन्हें कंप्यूटर भी समझ सकता है। (बोर्ड पर खड़ी लकीर खींचते हुए) यह ‘एक्सिस’ सौभाग्य-दुर्भाग्य दर्शाता है। ऊपर अच्छा स्वास्थ्य, ख़ुशी, मिलन। नीचे अशुभ घटनाएँ, मृत्यु, भयानक रोग, ग़रीबी। (बोर्ड पर आड़ी लकीर खींचते हुए) यह समय का ‘एक्सिस’ है। शुरुआत-अंत।

मैं आपको एक मार्केटिंग टिप दूँगा। वे लोग जो शिक्षा का ख़र्च उठा सकते हैं, किताबें और पत्रिकाएँ ख़रीद सकते हैं और उन्हें पढ़ सकते हैं, वे उन लोगों के बारे में पढ़ना पसंद नहीं करते जो ग़रीब या बीमार हैं। तो अपनी कहानी ऊपर कहीं से शुरू करें। सबसे सरल कहानी है, और अगर आप टेलीविजन देखते हैं, तो यह कहानी आपको बार-बार सुनाई जाती है। इस कहानी से कभी कोई नहीं थकता। मैं इस कहानी को ‘गड्ढे में फँसा आदमी’ बुलाता हूँ। लेकिन ज़रूरी नहीं कि इसमें आदमी और गड्ढा हो। (बोर्ड पर ग्राफ़ बनाते हुए) कोई मुसीबत में पड़ जाता है, फिर निकल आता है। कहानी के अंत में वो शुरुआत से अधिक ऊपर पहुँच जाता है, क्योंकि पाठक सोचता है, हे ईश्वर, मैं भी एक इंसान हूँ। अगर मैं मुसीबत में पड़ा, तो इतनी जमा ताक़त तो मुझमें भी होनी चाहिए।

एक और कहानी बहुत लोकप्रिय है, और इनमें से किसी कहानी पर कोई कॉपीराइट नहीं है। मैं इसे ‘लड़का-लड़की मिलन’ नाम से संबोधित करता हूँ। लेकिन इसके लिए हमें लड़के या लड़की की ज़रूरत नहीं है। यह किसी की भी कहानी हो सकती है। हमारे नायक के लिए आज एक और साधारण दिन है, जिसमें कुछ विलक्षण घटता है। हे भगवान, आज मेरे जीवन का सबसे अच्छा दिन है। (बोर्ड पर ग्राफ़ ऊपर जाता है, फिर नीचे आता है) धत्त तेरी की! (ग्राफ़ फिर ऊपर खींचते हुए) और वह दुबारा अपनी ख़ुशी हासिल कर लेता है।

जैसा कि कहा जा चुका है, मेरे पास शिकागो विश्वविद्यालय से एंथ्रोपोलॉजी में मास्टर्स डिग्री है। पता नहीं आप इसका क्या मतलब निकालेंगे। ख़ैर, वह एक बड़ी ग़लती थी। मैं आदिम लोगों को बर्दाश्त नहीं कर सकता। वे बहुत बेवक़ूफ़ होते हैं। आपको उनकी मूर्खता का प्रमाण देता हूँ। मैं पुस्तकालय गया और उनकी बताई गई कहानियों को ढूँढ़ कर पढ़ा। इन कहानियों को मिशनरी, नृवंशविज्ञानी, और दूसरे प्रकार के साम्राज्यवादियों ने इकट्ठा किया है। ये कहानियाँ बेहूदा हैं, बिल्कुल शिथिल किस्म की। (बोर्ड की ओर इशारा करते हुए) इस ‘एक्सिस’ पर कोई उतर-चढ़ाव नहीं। “हम एक नदी तक आए। हम एक पहाड़ पर गए। छोटा बीवर मर गया।” आप नहीं बता पाएँगे कि अच्छी ख़बर क्या है और बुरी ख़बर क्या है। आप हमारी कहानियों के अद्भुत उदय और पतन को देखें तो आपको यक़ीन हो जाएगा, उनकी कहानियों का हारना तय था।

एक और कहानी देखते हैं जो बहुत मशहूर है। और यह मेरे नियमों को तोड़ती है। (बोर्ड पर नीचे इशारा करते हुए) कहानी यहाँ से शुरू होती है। एक युवा लड़की है, किशोरी, संभवतः सत्रह साल की या अठारह। उसका दुर्भाग्य क्या है? उसकी माँ मर गई है। और उसके बाप ने लगभग तुरंत ही एक कुल्हाड़ी जैसी औरत से दूसरी शादी कर ली है, जिसकी दो भयानक बेटियाँ है। रात को महल में एक पार्टी होने वाली है। ओह, आपने यह कहानी सुनी है? बढ़िया है।

तो उसे अपनी नई माँ और बहनों की पार्टी के लिए सजने-सँवरने में मदद करनी है, जिसमें वह ख़ुद नहीं जा सकती। वह पार्टी में जाने लायक़ नहीं है। क्या इससे उसका दुख बढ़ता है? नहीं। वह एक सीधी-सादी लड़की है, जिसका सबसे बड़ा दुख उसकी माँ की असमय मृत्यु है। जब सभी लोग पार्टी के लिए निकल जाते हैं, उसकी परी गॉडमदर उससे मिलने आती है, और उसे जुराबें, मस्कारा, इत्र वग़ैरह लाकर देती है। परिवहन का साधन, घोड़ागाड़ी, वे सारी चीज़ें जो आपको एक पार्टी में जाकर मौज करने के लिए चाहिए। तो वह चली जाती है, और राजकुमार को उससे प्यार हो जाता है (बोर्ड पर ग्राफ़ ऊपर खींचते हुए।) यहाँ आपको समझना होगा कि वह इतना मेकअप लगा चुकी है कि उसके अपने रिश्तेदार उसे पहचान नहीं पा रहे।

कोई बात नहीं। कहे अनुसार घड़ी में बारह बजते हैं, और वह अपनी सारी चीज़ें खो देती है। सब छिन जाता है, जैसा कि उसकी परी गॉडमदर ने कहा था। (बोर्ड पर ग्राफ़ नीचे लाते हुए) यहाँ उतार गहरा है। घड़ी को बारह बजने में अधिक देर नहीं लगती।

क्या वह उसी स्तर पर जाकर गिरती है, जहाँ से उसने शुरू किया था? नहीं, अपना बाक़ी जीवन वह उस समय को याद करेगी, जब वह पार्टी की जान थी। इस कारण वह उतना भी नीचे जाकर नहीं गिरती। फिर क्या? (ग्राफ़ ऊपर खींचते हुए) उसका जूता फिट बैठता है और उसे अपार ख़ुशी मिल जाती है।

एक और कहानी फ़्रांत्स काफ़्का की है। बहुत निराशावादी। यहाँ नीचे से शुरू होती है। यह एक अनाकर्षक आदमी की कहानी है, जो एक घटिया नौकरी करता है, और असहमत रिश्तेदारों से घिरा हुआ है। अब उसके काम पर जाने का समय हो रहा है, (ग्राफ़ नीचे लाते हुए) लेकिन वह कॉकरोच में बदल गया है।

ठीक है। क्या साहित्य की आलोचना में इनका कोई प्रयोजन है? मेरे ख़याल से शायद है। मुझे लगता है कि यह उत्थान और पतन वास्तव में कृत्रिम हैं। हम दिखावा करते हैं—जीवन के बारे में वास्तव से अधिक जानने का। और, शायद एक सच्चे मास्टरपीस को इस डिजाइन के क्रूस पर नहीं चढ़ाया जा सकता।

चलिए ‘हैमलेट’ का ग्राफ़ देखते हैं। कहानी की शुरुआत के लिए मुझे नया स्तर नहीं तलाशना है। लिंग उलट गए हैं, लेकिन हैमलेट की स्थिति सिंड्रेला जैसी ही है, बस वह उम्र में थोड़ा अधेड़ है। उसके पिता की मृत्यु हो गई है, और उसकी माँ ने उसके चाचा से दूसरी शादी कर ली है। इसलिए वह सिंड्रेला जितना ही उदास है। इस बीच उसका दोस्त होरेशियो आकर उससे कहता है, “हैमलेट, ऊपर मुँडेर पर कुछ है, जिससे तुम्हें बात करनी चाहिए। कहता है कि वह तुम्हारे पिता हैं।”

हैमलेट वहाँ ऊपर जाता है, और उस चीज़ से बात करता है, जिसके बारे में कुछ नहीं पता। अगर आपमें से किसी ने भूत-प्रेत को बुलाने की कोशिश की है, तो आपको पता होगा कि चारों तरफ़ बुरी आत्माएँ मँडरा रही हैं जो आप जैसे बेवक़ूफ़ों को ग़लत सलाह देने को उतावली रहती हैं। जो आपको चोट पहुँचाने के तरीक़े खोजते रहते हैं। इसलिए, हम आज तक नहीं जानते कि क्या वहाँ मुँडेर पर वह रहस्यमय चीज़ वास्तव में हैमलेट के पिता का भूत था, और क्या वह सच बोल रहा था। लेकिन उसने कहा, “मैं तुम्हारा पिता हूँ और मेरी हत्या उस आदमी ने की है जो अब राजा बन गया है। तुम मेरा बदला लो।” ख़ैर, क्योंकि हम नहीं जानते कि वह चीज़ क्या थी, यह न तो अच्छी ख़बर है, न ही बुरी ख़बर है। (बोर्ड पर सीधी लकीर खींचते हैं।)

“ठीक है…” हैमलेट कहता है, “मुझे पता है कि मैं क्या करूँगा। मैं एक नाटक का मंचन करूँगा। मैं भाड़े पर अभिनेताओं को लाऊँगा और उनसे वैसी ही हत्या का नाटक करवाऊँगा, जैसा वर्णन मुँडेर के भूत ने किया है। और मैं संदिग्ध हत्यारे की प्रतिक्रिया देखकर पता लगाऊँगा कि हत्या उसने की है या नहीं।” ठीक है, तो हैमलेट ऐसा करता है, और उसका नाटक बहुत बड़ा फ्लॉप निकलता है। उसके चाचा को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। (सीधी लकीर को बढ़ाते हुए) कुछ भी नहीं होता। नाटक के फ्लॉप होने के तुरंत बाद हैमलेट अपनी माँ का कमरे में जाता है और उनसे बात कर रहा होता है, और परदे हिलते हैं। वह सोचता है कि उसका चाचा पीछे छिपा हुआ है, और वह अब फ़ैसला लेगा। वह अपनी तलवार निकालता है और उसे परदे में घुसा देता है। कौन बाहर आकर गिरता है? नालायक पोलोनियस। शेक्सपियर के मुताबिक़ वह नीरा मूर्ख है। जिसे आप न उधार देंगे, न जिससे आप उधार लेना चाहेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद कि वह मर गया। क्या यह बुरी ख़बर है? क्या हैमलेट गिरफ़्तार होने जा रहा है? नहीं। तो यह न ही अच्छी ख़बर है और न ही बुरी ख़बर। (सीधी लकीर को और बढ़ाते हैं।) अंत में, हैमलेट एक द्वंद्वयुद्ध में घुसता है और मारा जाता है। अगर वह स्वर्ग जाता है, तो सिंड्रेला की तरह उसे असीम ख़ुशियाँ मिलती हैं। अगर वह नरक जाता है, तो वह काफ़्का के कॉकरोच की तरह गर्त में है। लेकिन हम नहीं जानते। (लकीर और बढ़ाते हुए।) मुझे नहीं लगता कि हैमलेट स्वर्ग और नर्क में विश्वास करता था। शेक्सपियर नहीं करता था, ये हम जानते हैं।

तो मैं यह साबित कर सकता हूँ कि शेक्सपियर उतना ही बड़ा कहानीकार है जितना कोई आदिम मानव। लेकिन मैं यह नहीं करूँगा। मैंने वास्तव में आपको इतना ही बताया कि एक मास्टरपीस के रूप में इसका इतना सम्मान क्यों किया जाता है। हमें शायद ही कभी सच बताया जाता है। और हैमलेट में शेक्सपियर हमें बताते हैं कि हम जीवन के बारे में पर्याप्त नहीं जानते कि अच्छी ख़बर और बुरी ख़बर में फ़र्क़ कर सकें। शुक्रिया बिल!

सोचा जाए तो हम केवल यह जानने का नाटक करते हैं कि हमें पता है अच्छी ख़बर क्या है और बुरी ख़बर क्या। इसके लिए हमें प्रशिक्षित किया जाता है। हम सभी अपने आस-पास के लोगों के भावनाओं की नक़ल करते हैं। कल्पना कीजिए तीन-चार साल के एक छोटे बच्चे की, जिसके माता-पिता उत्साहित हैं। उनके पास इस बच्चे के लिए दुनिया की सबसे बढ़िया ख़बर है। और बच्चा सोचता है, ओह, क्या ख़बर हो सकती है? फिर धमाका होता है, “आज तुम्हारा जन्मदिन है!” इससे ज़्यादा खोखली ख़बर क्या हो सकती है! और इसलिए बच्चा हें हें हें हें… हँसता है। और आपको पता होगा, यह सिलसिला चलता रहता है। हमारी टीम जीत गई। हें हें हें हें… हमारा उम्मीदवार चुना गया। हें हें हें हें…

यद्यपि मैं स्वर्ग-नर्क में विश्वास नहीं करता, मैं एक बार ऐसी जगह ज़रूर जाना चाहता हूँ, बस किसी से यह पूछने के लिए, “भाई, अच्छी ख़बर क्या थी और बुरी ख़बर क्या?” हम कभी दावे से साथ नहीं कह सकते।

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कर्ट वोनेगट (11 नवंबर 1922–11 अप्रैल 2007) अमेरिकी उपन्यासकार हैं। सौरभ राय हिंदी की नई नस्ल से वाबस्ता कवि-अनुवादक हैं। वह बेंगलुरु में रहते हैं। उनसे sourav894@gmail.com पर बात की जा सकती है। यह प्रस्तुति कर्ट वोनेगट के द्वारा साल 2004 में दिए गए वक्तव्य पर आधृत है। इस वक्तव्य को यहाँ सुना जा सकता है :

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