कवितावार में वाल्ट ह्विटमैन की कविता ::
अनुवाद : आग्नेय

walt whitman poem

एक निरभ्र मध्यरात्रि

ओ आत्मा!
यह प्रहर तुम्हारा है
भरो अपनी स्वाधीन उड़ान नि:शब्द में
किताबों से दूर
कला से दूर
दिवस मिट गया है
सबक पूरा हो चुका है
तुम पूरी तरह उदित, मौन निहारते
और उन कथानकों को विचारते
जिनको तुम सर्वाधिक प्रेम करते हो
वह रात्रि, वह निद्रा, वह मृत्यु और वे तारे

***

[ वाल्ट ह्विटमैन (31 मई 1819 – 26 मार्च 1892) की कविता अमेरिकी महाद्वीप की आत्मा की कविता है. ऐसे कवि विरल ही होते हैं जिनकी कविता में किसी महाद्वीप की आत्मा स्पंदित होती है. यह तभी संभव है, जब उसके पास इंद्रियबोध की आसक्ति और रागात्मकता हो. वाल्ट ह्विटमैन ऐसे ही कवि हैं. उनकी कविता के शब्द अपनी शारीरिकता और भौतिकता लिए होते हैं. उन्हें आप सिर्फ पढ़ते और सुनते ही नहीं, बल्कि उन्हें जीवित वस्तुओं की तरह स्पर्श कर सकते हैं और उनकी विपुलता को अनुभव भी. यहां प्रस्तुत कविता अंग्रेजी से अनूदित है और ‘पोएम हंटर’ से ली गई है. आग्नेय हिंदी के समादृत कवि-अनुवादक और ‘सदानीरा’ के प्रधान संपादक हैं.]

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