कवितावार में तादेऊष रुज़ेविच की कविता ::
अनुवाद : आग्नेय

Rozewicz Tadeusz
तादेऊष रुज़ेविच

जीवन के मध्य में

संसार का अंत होने पर
मेरी मृत्यु के पश्चात
जीवन के मध्य में
अपने को पाया मैंने
अपने को रचा मैंने
किया जीवन का निर्माण
किया लोगों, जानवरों, भू-दृश्यों का निर्माण
यह मेज है—मैं कह रहा हूं
यह मेज है

मेज पर रखे हैं—रोटी और चाकू
काम करता है चाकू रोटी काटने का
पोषित करते हैं लोग अपने को रोटी से

मनुष्य से प्रेम करना चाहिए
यही सीख रहा था मैं दिन-रात
चाहिए किससे प्रेम करना
मैंने उत्तर दिया—मनुष्य!

यह एक खिड़की है
खिड़की के उस पार है एक बगीचा
बगीचे में मैं देखता हूं एक सेब का वृक्ष
सेब का वृक्ष होता है पुष्पित
झरते हैं पुष्प
फल लेते हैं आकार
और पकते हैं
पिता मेरे बीनते हैं सेब
सेब बीनता वह आदमी पिता है मेरा

मैं बैठा हूं घर की दहलीज पार
वह बूढ़ी औरत
खींचती है रस्सी से जो अपनी बकरी
दुनिया के सात चमत्कारों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण और मूल्यवान है
जो यह सोचता है और करता है अनुभव
कि वह नहीं है जरूरी
वह दोषी है नरसंहार का

यह एक मनुष्य है
यह एक वृक्ष है
यह एक रोटी है
जीवित बने रहने के लिए मनुष्य
पोषण करते हैं अपना

दुहराता हूं स्वयं को
महत्वपूर्ण है मानवीय जीवन
महान महत्ता है मानवीय जीवन की
जीवन का मूल्य
पार कर जाता है उन सारी चीजों के मूल्यों को
जिनको बनाते हैं मनुष्य

दृढ़तापूर्वक दुहराता हूं मैं
मनुष्य एक महान खजाना है

यह पानी है मैं कह रहा हूं
मैं अपने हाथ से लहरों को थपकियां देता हूं
और नदी से करता हूं वार्तालाप
पानी कहा मैंने
अच्छा पानी,
यह मैं हूं
पानी से बतकही करता है मनुष्य
चंद्रमा से, पुष्पों से, वर्षा से
बतकही करता है मनुष्य
वसुंधरा से, पक्षियों से, आकाश से
बतकही करता है मनुष्य

आकाश नीरव है
वसुंधरा नीरव है
यदि वह सुनता है कोई आवाज
जो बहती है धरती से, आकाश से, पानी से
आवाज वह है
एक दूसरे मनुष्य की

***

तादेऊष रुज़ेविच (9 अक्टूबर 1921–24 अप्रैल 2014) पोलिश भाषा के अप्रतिम कवियों-लेखकों में शुमार हैं. आग्नेय हिंदी के समादृत कवि-अनुवादक और ‘सदानीरा’ के प्रधान संपादक हैं. यहां प्रस्तुत कविता विश्वप्रसिद्ध कवियों की कविताओं के उनके मार्फत किए गए अनुवादों की पुस्तक ‘रक्त की वर्णमाला’ (2011) से ली गई है.

1 Comment

  1. रोहित ठाकुर August 12, 2018 at 7:56 am

    बहुत ही सुन्दर और यथार्थवादी कविताएँ ।

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