कालपेट्टा नारायणन की कविताएं ::
मलयालम से अनुवाद : बाबू रामचंद्रन

कालपेट्टा नारायणन

अपराधी

अपराधियों का जुर्म साबित करना
बहुत आसान होता है

एक हद से आगे
वे कुछ भी छुपा नहीं सकते

जिस राज को वे छुपा रहे होते हैं
उसके ही इर्द-गिर्द घूमते रहते हैं उनके झूठ…

थोड़े-बहुत विरोधी होंगे उनके बयान
लेकिन अंत में वे कबूलेंगे अपने सब गुनाह
आखिर, उन्हें मालूम जो है सब कुछ

जीना हराम होता है
बेगुनाह लोगों की वजह से
कबूल ही नहीं करेंगे वे कभी अपना जुर्म
सहयोग शब्द का मतलब जैसे कि सुना ही नहीं कभी

उनकी सहनशक्ति कमाल की होती है

उनकी मांद को अगर खोदकर देखेंगे
तब हमें हासिल
कुछ नहीं होगा

बेगुनाहों से
ज्यादा सख्त दिल
और कोई नहीं इस दुनिया में

समयप्रभु

घने अंधेरे में
बिल्ली की तरफ
इशारा करते हुए
चुहिया अपने बच्चे को सिखा रही है :

‘‘सुनो, इनकी दृष्टि बड़ी तेज है
तुम कभी भी इनकी नजर में पड़ सकते हो

इनके कान भी बहुत तेज हैं
फर्श पर गिरते रोएं की आहट से भी
वे पहचान लेते हैं
तुम्हें

सौम्य व्यक्तित्व!
वे अपने बच्चे के नरम दस्तानों का उपयोग करेंगे
तुम्हारे पीछे पलटने के लिए

वे धैर्य से प्रेरित हैं
चार-पांच घंटे लगाते हैं
तुम्हें आराम से
दुम तक निगल लेने में

वे दया के शिखर हैं
सिर्फ उतना जख्मी करेंगे तुम्हें जितना जरूरी है

वे कभी तुम्हें निराश नहीं करेंगे
जान वापिस भी मिलेगी
कई बार तुम्हें

बेहद कद्रदान हैं स्वामी
मजे से चखते रहते हैं तुम्हें
दुम के आखिरी कंपन तक

कभी कोई जल्दी नहीं उन्हें
समय के प्रभु हैं
स्वामी…’’

राहत

जब मेरी मां गुजर गई
तब मुझे बड़ी राहत महसूस हुई

अब मैं रात को भूखा रह सकता हूं
वह मुझे बेचैन नहीं करेगी

अब मुझे नहाने के बाद
बालों को ठीक से सुखाना नहीं पड़ेगा

अब कोई हाथ फैलाकर
गीलापन नहीं परखेगा

अब मैं कुएं की आधी दीवार पर बैठकर
आधी नींद में किताब पढ़ सकता हूं

भागकर आती हुई कोई चीख
अब मुझे नींद से नहीं उठाएगी

अब मैं सांझ होने पर बगैर टॉर्च लिए भी
अंधेरे में निकल सकता हूं

सांप के डंसने से मर जाने वाले पड़ोसी की याद में
रात-रात भर जागने वाली अब नहीं रही

अब मैं जहां हूं
वहां निश्चिंत सो सकता हूं

मेरे आने से ही बुझने वाला दीपक
अब हमेशा के लिए बुझ गया

अपने किए की सजा भुगत रहा हूं मैं
गर्भकालीन आकुलता से
मेरी मां मुक्त हो ही गई
आखिर उसका मुझे जन्म देना खत्म हुआ

अब इस धरती पर भले बदन दर्द से रोए
संताप से कोई नहीं रोएगी अब

सादृश्य

दीवार पर लटकी हुई
मेरी पुरानी तस्वीर देखकर
पहली बार घर आए
मेरे दोस्त ने पूछा :

‘छोटा भाई…?’

‘हां…’

‘लगभग वही रूप
लगभग वही उच्छृंखल केश
लेकिन आंखें इतनी डूबी हुई-सी नहीं
सुंदर स्मृतियां
इतने फासले पर नहीं…’

दोस्त ने कहा

आत्मविश्वास ने
उसके प्रयासों को तेजी दिखलाई
उसके जोड़ों को मजबूती दिलाई
अकेलेपन में भी कभी
उसने खुद को अकेला नहीं पाया

तस्वीर की तरफ
एक बार और घूरकर
दोस्त ने नीची आवाज में पूछा मुझसे :

‘अब नहीं रहा ना…?’

‘नहीं…,
प्राय: नहीं!’

***

कालपेट्टा नारायणन मलयालम साहित्य का एक प्रतिष्ठित नाम हैं. वह अपनी कविताओं, कहानियों और निबंधों के लिए जाने जाते हैं. बाबू रामचंद्रन हिंदी के कई चर्चित कवियों का मलयालम में अनुवाद कर चुके हैं और कर रहे हैं, लेकिन यह पहला अवसर है जब उनके मार्फत मलयालम कविता हिंदी अनुवाद में कहीं प्रकाशित हो रही है. कालपेट्टा नारायणन से kalpettanarayanan@gmail.com पर और बाबू रामचंद्रन से alberto.translates@gmail.com पर बात की जा सकती है.

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