कवितावार में सी. पी. कवाफ़ी की कविता ::
अनुवाद : आग्नेय

सी. पी. कवाफ़ी

शहर

तुमने कहा, ‘‘मैं एक दूसरे देश चला जाऊँगा,
मैं एक दूसरे साहिल को परखूँगा,
एक दूसरा शहर होगा जो इस शहर से बेहतरीन होगा।
यहाँ मैं जो भी करता हूँ, वह अग्रिम में तिरष्कृत है
और मेरा हृदय एक मृतक के हृदय की तरह दफ़्न है।
मेरा मन कब तक इस दलदल में रह पाएगा?
जहाँ भी मुड़ता हूँ, जहाँ भी मैं देखता हूँ, मैं देखता हूँ
अपने जीवन के खंडहर ही!—
जहाँ मैंने बिताए और उनमें पैबंद लगाए और व्यर्थ में गँवाए इतने सारे वर्ष!’’

तुम नहीं खोज पाओगे कोई भी नया देश।
तुम नहीं खोज पाओगे कोई भी नया साहिल।
यह शहर तुम्हारा पीछा करेगा, तुम भटकोगे
उन्हीं सड़कों पर और उन्हीं पड़ोसों में बुढ़ा जाओगे।
उन्हीं घरों में तुम्हारे केश धवल हो जाएँगे,
और तुम हमेशा उसी शहर में पहुँचोगे। छोड़ दो उम्मीद
किसी दूसरी जगह जाने की। कोई जहाज़, कोई मार्ग
तुम्हें वहाँ नहीं ले जा सकता!
जिस तरह तुमने अपने जीवन को नष्ट कर दिया इस मामूली कोने में,
वैसे ही तुमने उसे नष्ट कर दिया पृथ्वी पर हर जगह!

***

ग्रीक कवि सी. पी. कवाफ़ी (29 अप्रैल 1863-29 अप्रैल 1933) समस्त संस्कृतियों के दाय और उसके अंधकार के सार्वभौमिक और सार्वकालिक कवि हैं; क्योंकि उनकी कविताएँ समय, भाषा और भूगोल को पार कर जाती हैं। उनकी कविता को पढ़ना अपने जीवन को पढ़ना बन जाता है और कुछ देर के लिए सही आप अपने को खोज लेते हैं, पा लेते हैं। हिंदी की समकालीन कविता के कुछ प्रमुख कवियों पर उनकी कविता और काव्य-शिल्प का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है—विशेषकर श्रीकांत वर्मा और कुँवर नारायण के संपूर्ण काव्य-जगत पर। यहाँ प्रस्तुत कविता The City को एक कालजयी कविता का दर्जा हासिल है। यह कविता कवाफ़ी ने 1894 में लिखी और उसको Prisons शीर्षक के अंतर्गत संकलित किया गया। यहाँ प्रस्तुत इस कविता का हिंदी अनुवाद एडमंड कीले और फ़िलिप शेर्राड द्वारा अनुवादित और जॉर्ज सविडिस द्वारा संपादित ‘सी. पी. कवाफ़ी : कलेक्टेड पोयम्स’ एवं एनी शरोत द्वारा अनुवादित ‘सी. पी. कवाफ़ी : सलेक्टेड पोयम्स’ में प्रकाशित अँग्रेज़ी अनुवाद पर आधृत है। 

आग्नेय हिंदी के समादृत कवि-अनुवादक और ‘सदानीरा’ के प्रधान संपादक हैं।

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