ई. ई. कमिंग्स के कुछ उद्धरण ::
अनुवाद : रंजना मिश्र

writer e. e. cummings
ई. ई. कमिंग्स

सिर्फ प्रेमी ही सूर्य की किरणें धारण करते हैं।

*

सुनो, पड़ोस के मकान में एक बेहतर सृष्टि का नर्क है, चलो चलें।

*

जब तक तुम किसी से प्यार नहीं करते, कोई भी चीज़ मायने नहीं रखती।

*

वह तुम हो जो चाँद का हमेशा से मतलब था और सूरज जो हमेशा गाएगा, वह तुम ही हो।

*

जो भी तुम सोचते हो, विश्वास करते या जानते हो; तुम बहुत सारे दूसरे लोग हो, पर जिस घड़ी तुम महसूस करते हो, तुम और कोई नहीं बस तुम रह जाते हो।

*

मैं एक पंछी से सीखूँगा किस तरह गाना चाहिए न कि हज़ार तारों को सिखाऊँगा कि कैसे न नाचा जाए।

*

बढ़ने और वह होने के लिए, जो तुम हो, साहस की ज़रूरत होती है।

*

और कुछ न होना, सिर्फ़ वह होना जो तुम हो, एक ऐसी दुनिया में जो दिन रात तुम्हें औरों की तरह बनाने की कोशिश में लगी हो, सबसे मुश्किल लड़ाई है जो एक इंसान लड़ता है और यह लड़ाई कभी ख़त्म नहीं होती।

*

नष्ट करना किसी भी तरह के रचने की पहली सीढ़ी है।

*

मृत न होना ज़िंदा होना नहीं है।

*

मैं अपनी आय से इतना पीछे चल रहा हूँ कि ऐसा कहा जा सकता है कि हम अलग रह रहे हैं।

*

व्यक्तिगत संपत्ति की शुरुआत उस समय से शुरू हुई जब किसी ने अपना ख़ुद का दिमाग़ रखना शुरू किया।

*

हवा ने बारिश को उड़ा दिया, उड़ा दिया आकाश को और सारे पत्तों को, और वृक्ष खड़े रहे। मेरे ख़याल से, मैं भी, पतझड़ को लंबे समय से जानता हूँ।

***

ई. ई. कमिंग्स (14 अक्टूबर 1894–3 सितंबर 1962) प्रख्यात अमेरिकी कवि-लेखक हैं। उनके यहाँ प्रस्तुत उद्धरण हिंदी अनुवाद के लिए poets.org से चुने गए हैं। रंजना मिश्र हिंदी कवयित्री और अनुवादक हैं। वह पुणे में रहती हैं। उनसे ranjanamisra4@gmail.com पर बात की जा सकती है।

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *