एमिली ब्रॉण्टे के कुछ उद्धरण ::
अनुवाद : सरिता शर्मा

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एमिली ब्रॉण्टे

अगर सब कुछ ख़त्म हो जाए और सिर्फ़ वही बचा रह जाए, तो मैं ज़िंदा रहूँगी : और अगर उसके सिवाय सब कुछ बचा रह जाता है, मेरी लिए दुनिया अजनबी हो जाएगी।

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वह कभी नहीं जान पाएगा कि मैं उससे प्रेम करती हूँ : और यह भी कि ऐसा उसकी ख़ूबसूरती के चलते नहीं है, बल्कि वह मुझसे भी बढ़कर मेरा हिस्सा है। हम दोनों की आत्माएँ जिस भी चीज़ की बनी हों, वे एक हैं।

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हमेशा मेरे साथ रहो—चाहे कोई भी रूप धारण करो—मुझे पागल बना दो! मुझे ऐसे अधर में मत छोड़ो जहाँ मैं तुम्हें ढूँढ़ न सकूँ! हे ईश्वर! कैसे कहूँ! मैं अपने जीवन के बिना नहीं रह सकती! मैं अपनी आत्मा के बिना नहीं रह सकती!

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काश! मैं फिर से वह लड़की हो सकती—कुछ जंगली और खुरदरी, कठोर और आज़ाद।

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आतंक ने मुझे क्रूर बना दिया…

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मैंने तुम्हारे दिल को नहीं तोड़ा—तुमने खुद उसे तोड़ा है : और उसे तोड़कर तुमने मेरा दिल तोड़ दिया।

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मैंने उसे अपना दिल दिया, और उसने लेकर उसे कुचलकर मार डाला : और मेरी ओर वापस उछाल दिया। …और चूँकि उसने मेरा दिल नष्ट कर दिया, मेरे पास उसके लिए कोई भावनाएँ नहीं हैं।

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मुझे ख़ुद को साँस लेने के लिए याद दिलाना पड़ता है—दिल को भी धड़कने के लिए याद दिलाती हूँ।

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ईमानदार लोग अपने कामों को छुपाते हैं।

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मैं उसके पैरों के नीचे की ज़मीन से प्यार करती हूँ, और उसके सिर पर बहने वाली हवा से, और जिसे भी वह छूता है। उसके कहे हर शब्द से मुझे प्यार है। मुझे उसकी शक्ल और उसके सब कामों से प्यार है और मैं उससे पूरी तरह प्यार करती हूँ।

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हिंसा के भाले दोमुँहे हैं, वे इसका सहारा लेने वालों को उनके दुश्मनों से अधिक घायल करते हैं।

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घमंडी लोग अपने लिए दुःख उत्पन्न कर देते हैं।

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बुरे लोगों को सज़ा देना ईश्वर का काम है, हमें माफ़ करना सीखना चाहिए।

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तुम्हें तब तक मुक्ति न मिले, जब तक मैं ज़िंदा हूँ।

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तुम्हें मुझे माफ़ कर देना चाहिए, क्योंकि मैंने सिर्फ़ तुम्हारे लिए संघर्ष किया था।

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एमिली ब्रॉण्टे (30 जुलाई 1818–19 दिसंबर 1848) विश्वप्रसिद्ध अँग्रेज़ी लेखिका हैं। वह अपने उपन्यास ‘वुदरिंग हाइट्स’ के लिए संसार भर में सराही जाती हैं। यहाँ प्रस्तुत उद्धरण हिंदी अनुवाद के लिए उनके इसी उपन्यास से लिए गए हैं। सरिता शर्मा सुपरिचित हिंदी लेखिका और अनुवादक हैं।]

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