वी. एस. नायपॉल के कुछ उद्धरण ::
अनुवाद : सरिता शर्मा

v s naipaul
वी. एस. नायपॉल

हम वास्तव में केवल उस झूठ के लिए दंडित होते हैं, जिसे हम स्वयं बताते हैं।

कुछ भावनाएँ वर्षों की दूरी ख़त्म कर देती हैं और असंभव स्थानों को जोड़ देती हैं।

जो सरकार अपने क़ानून तोड़ देती है, वह आपको भी आसानी से तोड़ सकती है।

अगर किसी लेखक को सब पता हो जो होने जा रहा है, तो उसकी पुस्तक उसके शुरू करने से पहले ही मर जाएगी।

मैं जानता था कि मुझे कहाँ जाना है। मैंने सही दरवाज़ा खटखटाया।

खंडहरों में होने से हमारा समय-बोध गड़बड़ा जाता है।

मेरा जीवन छोटा है। मैं घिसी-पिटी बातें नहीं सुन सकता।

मैं कहता हूँ कि मैं अपनी किताबों का निचोड़ हूँ।

लेखकों को लोगों को असहमति के लिए उकसाना चाहिए।

हमें हमेशा स्थिति की सच्चाई देखने की कोशिश करनी चाहिए, इससे हम चीज़ों को सार्वभौमिक बना सकते हैं।

मेरे बारे में जो कुछ भी मायने रखता है, सब मेरी किताबों में है।

यह महत्वपूर्ण है कि लोगों पर बहुत अधिक भरोसा न किया जाए।

अगर लेखक बैठकर बस दमन के बारे में बात करते रहेंगे, तो वे ज़्यादा लिख नहीं पाएँगे।

जिस सभ्यता ने दुनिया भर पर क़ब्ज़ा किया हो, उसे मरती हुई सभ्यता नहीं कहा जा सकता।

एक लेखक की जीवनी में—या यहाँ तक कि उसकी आत्मकथा में भी—हमेशा अपूर्णता रहेगी।

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साल 2001 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित वी. एस. नायपॉल (17 अगस्त 1932–11 अगस्त 2018) अँग्रेज़ी के प्रख्यात गल्पकार हैं। सरिता शर्मा सुपरिचित हिंदी लेखिका और अनुवादक हैं। उनसे sarita12aug@hotmail.com पर बात की जा सकती है। यहाँ प्रस्तुत उद्धरण हिंदी अनुवाद के लिए www.goodreads.com से चुने गए हैं.

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