दुन्या मिखाइल की कविता ::
अनुवाद : राहुल तोमर

Dunya Mikhail POEM
दुन्या मिखाइल

नव वर्ष

एक

द्वार पर दस्तक हुई
अफ़सोस
यह नव वर्ष है तुम नहीं।

दो

मैं नहीं जानती कि कैसे जोड़ूँ तुम्हारी अनुपस्थिति को अपने जीवन में
मैं नहीं जानती कि कैसे घटाऊँ स्वयं को उससे
मैं नहीं जानती कि कैसे विभाजन करूँ उसका—
प्रयोगशाला की कुप्पियों में।

तीन

समय ठहर गया बारह बजे
और परेशान हुआ घड़ीसाज़
कोई भी ख़ामी नहीं थी घड़ी में
बात बस उन हाथों की थी
जिन्होंने इस दुनिया का आलिंगन किया
और फिर भूल गए उसे।

***

दुन्या मिखाइल प्रसिद्ध इराक़ी-अमेरिकी कवयित्री हैं। यहाँ प्रस्तुत कविता (The New Year) एलिज़ाबेथ विंस्लो कृत अँग्रेज़ी अनुवाद पर आधृत है। राहुल तोमर हिंदी कवि-अनुवादक हैं। वह इंदौर में रहते हैं। उनसे tomar.ihm@gmail.com पर बात की जा सकती है। इस प्रस्तुति से पूर्व ‘सदानीरा’ के लिए उन्होंने अदूनिस की कुछ कविताओं का अनुवाद किया था, उन्हें यहाँ पढ़ें :

संपन्न संभावनाओं की ओर

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *