एक पत्थर किसी का नहीं होता

रसेल एडसन की तीन कविताएं ::

अनुवाद : प्रचण्ड प्रवीर

स्मृति और दूरी

यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि दूरी में प्रवेश करते हुए कोई छोटा होने लगता है. अंततः इतना छोटा हो जाता है कि वह केवल एक दूरबीन से देखा जा सके, या फिर बहुत अधिक आत्मीयता के लिए, केवल एक सूक्ष्मदर्शी से…

लेकिन एक लोप हो जाने वाला बिंदु भी है, जहां किसी को भी दूरी में प्रवेश करते हुए गायब जरूर होना होता है, बिना वापस लौटने की उम्मीद के, अपने कभी होने की केवल एक स्मृति शेष कर.

लेकिन वहीं कल्पित कहानी भी है, जहां कोई कभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं होता कि जो देखते-देखते अंत में गायब हुआ, वह कोई था भी या केवल कागज और स्याही से बना हुआ कोई…
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एक पत्थर किसी का नहीं होता

एक आदमी ने एक पत्थर पर घात लगाई. पकड़ लिया. अपना कैदी बना लिया. एक अंधेरे कमरे में रख कर ताउम्र उसकी पहरेदारी करने को मुस्तैद हो गया.

उसकी मां ने पूछा, क्यों?

उसने कहा, चूंकि यह बंदी है, क्योंकि यह पकड़ा गया है.

देखो, वह पत्थर सो रहा है, मां ने कहा, उसे पता भी नहीं कि वह किसी बाग में है या नहीं. शाश्वत और शिला मां-बेटी हैं, यह तो तुम हो जिसकी उम्र बीत रही है और वह पत्थर केवल सो रहा है.

लेकिन मैंने पकड़ा है इसे, मां, यह मेरा ही जीता हुआ है, आदमी ने कहा.

एक पत्थर किसी का नहीं होता, यहां तक कि अपना भी नहीं. यह तो तुम हो जो जीते गए हो, तुम बंदी की रक्षा कर रहे हो, जो तुम ही हो क्योंकि तुम बाहर जाने से डरते हो, मां ने कहा.

हां-हां, मैं घबराता हूं, क्योंकि तुमने मुझे कभी प्यार नहीं किया, आदमी बोला.

यह तो सच है, क्योंकि तुम मुझसे हमेशा वैसे ही रहे जैसा पत्थर तुमसे रहा, मां बोली.
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नाश्ते का टोस्ट

जैसे पुरुष ने देखा, उसकी पत्नी ने उसकी हथेली पर मक्खन लगाया
उसने पूछा कि वह उसकी हथेली पर मक्खन क्यों लगा रही है
स्त्री ने कहा कि मुझे लगा है यह टोस्ट का एक टुकड़ा है

जब पत्नी ने उसकी हथेली को दांतों से काट खाया
उसने पूछा कि तुम मेरी हथेली को क्यों काट रही हो?
मुझे लगा कि यह टोस्ट का एक टुकड़ा है

जब पत्नी ने दुबारा उसके हाथों को काट खाया
उसने पूछा कि अब क्यों मेरे हाथ को खाए जा रही हो?
क्योंकि मुझे अभी भी लगता है कि यह टोस्ट का एक टुकड़ा है…

***

[ रसेल एडसन (1935-2014) अमेरिकन कवि-उपन्यासकार हैं. उन्हें अमेरिका में गद्य-कविता के प्रमुख रचनाकारों में से एक स्वीकारा गया है.

प्रचण्ड प्रवीर कथा और दर्शन के इलाके में सक्रिय हैं. हिंदी और अंग्रेजी दोनों में लिखते हैं. हिंदी में एक उपन्यास, एक कहानी-संग्रह और सिनेमा से संबंधित एक किताब प्रकाशित हैं. और ज्यादा जानकारी के लिए prachandpraveer.com पर जाया जा सकता है.]

सदानीरा

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