जॉर्ज सेफेरिस की कविताएं ::
अनुवाद और प्रस्तुति : विपिन चौधरी

1963 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार प्राप्त बीसवीं सदी के महत्वपूर्ण कवि, आलोचक, अनुवादक और राजनयिक जॉर्ज सेफेरिस (13 मार्च 1900 – 20 सितंबर 1971) ने अपने लेखन में फ्रेंच और अंग्रेजी आधुनिकतावादियों (विशेष रूप से टी.एस. एलियट) को शामिल किया. उन्होंने ग्रीक के ऐतिहासिक स्थलों और समुद्र के मिथकों को लेकर एजियन आधुनिकता विकसित की और साथ ही गहन तबीयत की — व्यक्तिगत, राजनीतिक और निजी प्रतीकों के माध्यम से — अपनी लेखनी को विस्तार दिया.

जॉर्ज सेफेरिस उस शैलीगत पवित्रता और शाब्दिक आलंकारिकता के लिए जाने जाते हैं, जो समृद्ध कविता के लिए जरूरी मानी गई है. उनके अलावा ग्रीस के दर्द को कोई दूसरा कवि इतने बेहतर ढंग से व्यक्त नहीं कर पाया है. उनके अंतिम संस्कार के समय उमड़ी भीड़ ने उनकी कविता ‘डिनायल’ को दमनकारी सैनिकों के खिलाफ एक राजनीतिक गान के रूप में गाया.

सेफेरिस की कविताओं में अक्सर समकालीन भाषा और होमेर मिथकों के अनुभव आपस में गुंथे रहते हैं. इसके अतिरिक्त उनकी कई कविताएं भूमध्य सागर के परिदृश्य को बखूबी दर्शाती हैं. भटकाव और निर्वासन उनकी कविताओं में बार-बार आते हैं. एक राजनयिक होते हुए भी उन्हें एक राजनीतिक व्यक्ति के रूप में नहीं जाना गया.

तत्कालीन ग्रीस की राजनैतिक स्थिति निश्चित रूप से जॉर्ज सेफेरिस के लिए असहनीय थी. 28 मार्च 1969 को उन्होंने बी.बी.सी वर्ल्ड सर्विस की मदद से एक जबरदस्त संदेश प्रसारित किया था. उनके इस बयान को एथेंस के कई अखबारों ने दुबारा प्रकाशित किया था. गौरतलब है कि ग्रीस ने सात साल 1967–74 तक दक्षिणपंथी सैन्य जूंतस के तानाशाह नेतृत्व की पीड़ा भोगी थी. दो साल तक बड़े पैमाने पर सेंसरशिप, राजनीतिक नजरबंदियां और यातना को देखकर सेफेरिस का कवि मन तिलमिला गया. 21 अप्रैल 1967 को कर्नलों के एक समूह के नेतृत्व में ग्रीक तख्तापलट के बाद 24 जुलाई 1974 को इस तानाशाही का अंत हो गया. लेकिन इस अंत को देखने के लिए सेफेरिस जीवित नहीं रहे, 20 सितंबर 1971 को उनका निधन हो गया. उन्होंने परिष्कृत प्रगीतवाद और उसके उच्चारण की ताजगी से ग्रीक कविता को नया जीवन प्रदान किया. यहां प्रस्तुत कविताएं ग्रीस से मैनोलिस एल्जिजकिस कृत अंग्रेजी अनुवाद पर आधृत हैं.

George Seferis poet

छंद

अपने अजीज प्रेमी के हाथों भेजा गया
वह पल
मेरे पास काले कबूतर की तरह
लगभग गोधूलि की बेला में पहुंचा

मेरे सामने एक सड़क चमक रही है
निद्रा की मुलायम सांस
एक गुप्त दावत के अंत में…
अनाज के दाने-सा पल

जिसे तुम अकेला रख सकते हो
दुखद पनघड़ी
पूरी तरह से शांत
किसी दिव्य बाग में कई सिरों वाले सांप को देख लिया हो मानो उसने

*

बस कुछ देर और

बस कुछ देर और
और हम बादाम के पेड़ों को खिलते हुए देखेंगे
धूप में चमक रहे हैं पत्थर
समुद्र की घुमावदार तरंगे
बस कुछ देर और
आओ हम थोड़ा और ऊपर उठ जाएं

*

इनकार

समुद्र के एकांत किनारों पर
कबूतर की तरह सफेद
दुपहर को
हमारी प्यास उभरी
लेकिन पानी खारा था

सुनहरी रेत पर
हमने उसका नाम लिखा
समुद्री हवा चल पड़ी
उकेरा हुआ हो गया गायब

कौन-सी भावना के साथ कौन-से दिल के साथ
कैसी इच्छा और कैसा जुनून
क्या एक गलती से हम अपने जीवन का नेतृत्व करें
ताकि हमारा जीवन बदल सके अपनी दिशा

***

[ विपिन चौधरी हिंदी की सुपरिचित लेखिका और अनुवादक हैं. उनसे vipin.choudhary7@gmail.com पर बात की जा सकती है.]

जॉर्ज सेफेरिस का एक साक्षात्कार यहां पढ़ें :
‘मेरा संघर्ष हमेशा शुद्धता के लिए रहा है’

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