लिसा ब्लॉशील्ड की तीन कहानियां ::
अनुवाद : उदय शंकर

मेरे पुरुष

सोमवार की रात मैं एक हत्यारे के साथ सोई. उसे ऊंची बिल्डिंग से निशाने लेकर भीड़ को बेतरतीब तरीके से भूनना पसंद है. वह अपने इस कर्तव्य को नहीं भूलता तो अब तक भीड़ में कई-एक लोग मरे हुए पाए जाते. इस सबसे परे वह हमेशा मेरे घर पर साधारण खाने का मजा लेता है. हम कुछ खाते हैं, केबल-टीवी देखते हैं. इसके बाद हम एक दूसरे के निचले हिस्से को टटोलते हुए मदमस्त रहते हैं. यह ठीक ही है, क्योंकि मैं कौन-सा उससे प्यार करने जा रही हूं!

मंगलवार की रात मैंने एक ऐसे पुरुष को बर्दाश्त किया जो गंभीर रूप से बीमार था. उसके पास ज्यादा समय नहीं था, इसलिए हमने सब कुछ जल्दी समाप्त किया. इसके बाद उसने कागज के कप में खून की उल्टी की और बोला कि वह मरना नहीं चाहता. मैं उसे याद दिलाती हूं कि एक न एक दिन हम सबको जाना है. कागजी दिलासा देने के लिए ‘मृत्यु के बाद के जीवन के बारे में’ एक किताब को जोर-जोर से पढ़ती हूं.

बुधवार को मेरा पूर्व-प्रेमी पुराने दिनों की तरह ही मुझे भोगता है. कहता है कि वह मुझे पसंद नहीं करता, लेकिन वह अपने अतीत से ऐसे ही पीछा नहीं छुड़ा सकता.

गुरुवार की शाम मैंने अपने ऑफिस के लिए कैब ली और अपनी सबसे अच्छी दोस्त के पति के साथ रतिरत हुई. हमने अपने कपड़े नहीं उतारे. अभी मैंने अपने स्कर्ट को ऊपर उठाया ही था कि वह बोल उठा कि उसकी बीवी उस पर मालिकाना हक रखती है.

शुक्रवार की रात मेरे लिए सब्र की रात थी, वह आदमी अपने लिंग को उत्तेजित नहीं कर पा रहा था. मैंने उससे अश्लील बातें की और उसके शिश्न को पकड़कर बेशर्म की तरह उसकी पैंट से बाहर किया, लेकिन इसका उस पर कोई असर नहीं पड़ा. मैं बोली कि ठीक है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. वह मुझे तब तक देखता रहा, जब तक मैंने इसे सिद्ध नहीं कर दिया और खुद से ही खुद को संतुष्ट नहीं किया.

मैंने सप्ताहांत अपने प्रेमी के साथ व्यतीत किया. इसके बावजूद कि हम दोनों अलग-अलग लोगों के साथ संभोगरत रहते आए हैं, वह अभी भी मेरा प्रेमी है. हम अपने पसंदीदा आसनों को आजमाते हैं. ब्रेड पर बटर घिसते हुए अपने संबंधों के बारे में बातचीत करते हैं.

*

समलैंगिकों का कैंसर

अपने प्रेमी की नजर में मैं एक पुरुष हूं. मैं उसे खोना नहीं चाहती, इसीलिए उसकी गलतफहमी में साथ देती हूं.

वह मुझे अक्सर मोटा भाई, बॉस, पार्टनर, उस्ताद आदि संबोधनों से बुलाता है.

जन्मदिन पर ब्लूमिंगडेल के पुरुष सेक्शन से वह मेरे लिए उपहार खरीदता है. हम लिवाइस के जीन्स और चमड़े के बॉम्बर जैकेट पहनते हैं.

मैं अपने लम्बे बालों को टोपी के अंदर छुपा लेती हूं. मैं उसी की तरह, लेकिन उससे ज्यादा तेज और काली मूंछ चिपकाती हूं.

क्रिस्टोफर स्ट्रीट पर कदमताल करते हुए हम आवाजाही करते हैं.

वह मुझे समलैंगिक पुरुषों वाले ग्रीटिंग कार्ड भेजता है.

वह मुझे समलैंगिक पुरुषों वाले रोग देता है.

हम प्यार करते हैं, लेकिन अंदर जब्त करने के लिए नहीं, बल्कि उससे बाहर निकलने के लिए.

*

नपुंसक आदमियों को कैसे पटाएं

गांव के उस प्रमुख बार में जाओ, वहां वैसे पुरुष मिल जाएंगे जिनका लिंग उत्तेजित नहीं हो सकता.

वहां जो पुरुष सबसे उदास दिखे, उसके बगल में बैठ जाओ.

उसके कान में धीरे से कहो, संभोग ही सब कुछ नहीं है दुनिया में.

उससे कहो कि तुम्हें बारिश में हाथ पकड़कर चलने में उतना ही मजा आता है.

उससे कहो कि संभोग का तुम्हारा सबसे पसंदीदा आसन एक दूसरे से लिपटना और चुंबन है.

उससे कहो कि इसकी ज्यादा संभावना है कि अभी तक उसे कोई सही औरत नहीं मिली.

उसे अपने साथ घर चलने के लिए आमंत्रित करो.

थोड़ी देर बाद उससे बिस्तर में बोलो कि तुम सचमुच में उसके साथ हमबिस्तर होना चाहती हो.

उसे आदेश दो कि कोशिश करे, नहीं तो दफा हो जाए.

यह सब हो जाने के बाद उससे फिर पूछो कि उसने अभी तक कोशिश नहीं की.

उस पर आरोप लगाओ कि वह लौंडेबाज है.

उससे कहो कि तुम उससे बाद में मिल सकती हो, लेकिन तुम सोचती हो कि वह उम्र के इस पड़ाव पर आ गया है कि बदलाव की कोई आस बची ही नहीं है.

उसे किराए के पैसे दिए बगैर आधी रात बीच सड़क पर छोड़ दो.

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[ लिसा ब्लॉशील्ड अमेरिकन गल्पकार और पटकथा-लेखिका हैं. इनकी कहानियां और अन्य काम-काज कई महत्वपूर्ण पत्रिकाओं और संकलनों में शाया हो चुका है. यहां प्रस्तुत तीन कहानियां अनुवाद के लिए Bomb Magazine से चुनी गई हैं. अनुवादक उदय शंकर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पढ़े हुए हैं. हिंदी के शोधार्थी और आलोचक हैं. कथालोचक सुरेंद्र चौधरी की रचनाओं को तीन जिल्दों में संपादित किया है. उनसे udayshankar151@gmail.com पर बात की जा सकती है.]

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