मेरा गाँव पानी में बसता है

संदीप शिवाजीराव जगदाले की कविताएँ :: मराठी से अनुवाद : सुनीता डागा मेरा गाँव पानी में बसता है कोई पूछे नहीं मुझसे मेरा पता नहीं बता पाऊँगा मैं किस ठौर था मेरा गाँव कहाँ से आया हूँ कितने रास्ते निकल चुके हैं इन क़दमों के नीचे से गाँव-खलिहानों तक हहराता आया था पानी धड़ से ऊपर तक भरने लगा घबराहट से भागने लगा मैं जिस-तिस…

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