दुन्या मिखाइल की कविताएँ ::
अँग्रेज़ी से अनुवाद : राहुल तोमर

दुन्या मिखाइल

एक

रोशनी गिरती है उसकी आवाज़ से
जिसे पकड़ने का प्रयत्न करती हूँ
मैं जैसे ही दिन की
अंतिम रोशनी धुँधलाती है…
पर न वहाँ कोई रूप है छूने को
न ही मौजूद हैं किसी दर्द के निशान

दो

क्या स्वप्न
अपनी कुर्सियाँ ग्रहण कर रहे हैं
रात की ट्रेन पर सवार होने के लिए

तीन

वह पढ़ती है इच्छाओं की सूची
उसको मरने से रोकने के लिए

चार

सच्चाई चुंबन की तरह अवतरित होती है—
कभी एक मच्छर की तरह
कभी एक लालटेन की तरह

पाँच

कॉफ़ी के रंग की तुम्हारी त्वचा
मेरी आँखें खोल देती है दुनिया के प्रति

छह

हमारे पास बस एक क्षण है
और मैं तुम्हें प्रेम करती हूँ

सात

सभी बच्चे कवि होते हैं
जब तक वे छोड़ते नहीं उन
तितलियों के पास जाने की आदत
जो वहाँ हैं ही नहीं

आठ

जिस पल तुम्हें लगा कि तुमने मुझे खो दिया है
तुमने मुझे देखा एकदम साफ़
मेरे तमाम फूलों के साथ
उनके साथ भी जो अब सूख चुके हैं

नौ

अगर तुम समस्त व्यंजनों और
स्वरों को उच्चारोगे एक साथ
तो तुम सुन पाओगे उनके नामों को
बूँद दर बूँद गिरते हुए
बारिश के साथ

दस

हम अपने पुश्तैनी पेड़ों को
तराश कर बनाते हैं नाव
नौकाएँ तैर कर पहुँचती हैं बंदरगाहों पर
जो बहुत दूर से देखने पर लगते हैं सुरक्षित

ग्यारह

पेड़ बतियाते हैं एक दूजे से
पुराने दोस्तों की तरह
और उन्हें पसंद नहीं किसी की टोका-टाकी

वे पीछा करते हैं हर उस शख़्स का
जो काटता उनमें से किसी को भी,
और उसे तब्दील कर देते हैं
एक तन्हा कटी हुई डाल में
क्या यही वजह है कि अरबी में जब
हम कहते हैं : ‘‘पेड़ से कट जाना’’
तब हम कहना चाहते हैं :
‘‘हमारा कोई नहीं है’’

बारह

जिस तरह जड़ें पेड़ों के
भीतर छिप जाती हैं
उसी तरह रहस्य
चेहरे और हवा छिप जाते हैं
रंगों के पीछे
रोथको1मार्क रोथको जो एब्सट्रेक्ट पेंटिंग्स करते थे। वह मूलतः कम रंगों के सहारे जटिल भावनाएँ जगाने में माहिर थे। उनके आलोचकों का यह कहना रहा है कि वह बस रंगों का पैटर्न भर बनाते थे, वस्तुतः वह आयातों को गाढ़े रंग से भर देते थे। यहाँ दुन्या शायद यह कहना चाह रही हैं कि जिस तरह पेड़ों की जड़ें नहीं दिखतीं; पर वे होती हैं उसी तरह लोग, चेहरे, रहस्य इत्यादि रोथको की पेंटिंग्स में नहीं दिखते, पर निश्चित ही वे उस कैनवस में होते हैं और उनकी पेटिंग्स रंगों का महज़ कोई रैंडम जमावड़ा नहीं एक स्ट्रक्चर्ड प्रस्तुति है, जहाँ ब्रश का हर स्ट्रोक बेहद सोच-समझकर लगाया गया है। (अनुवादक) के शीर्षकहीन कैनवासों में

तेरह

क्या समंदर भूलेगा अपनी लहरों को
जिस तरह गुफाएँ भूल गई हैं हमें?

चौदह

बहुत पहले जब कोई भाषा नहीं थी
वे सूर्यास्त होने तक साथ चलते थे
अपने साथ सुर्ख़ पत्तियाँ लिए
जैसे याद रखने योग्य बातें

पंद्रह

यह सत्य है कि
दु:ख वायु की तरह होता है
हर जगह मौजूद
पर हम सब यह महसूस करते हैं
कि हमारा दुःख सबसे ज़्यादा दर्द देता है

सोलह

उनमें से कितने मर गए
तारों के नीचे
जो नहीं जानते थे उनके नाम

सत्रह

यदि वह किसी तरह बच पाए मेरे साथ

अठारह

एक लौ मद्धम होती है आग की भट्ठी में
एक दिन चुपके से सरक जाता है कैलेंडर से
और फ़ेरूज़ गाती है : ‘‘वे कहते हैं प्रेम समय की हत्या करता है
और वे यह भी कहते हैं कि समय प्रेम की हत्या करता है…’’

उन्नीस

फेरीवाला पेश करता है पर्यटकों को
दिल के टुकड़ों वाला गले का हार
सीपियाँ जो बुदबुदाती हैं समंदर के रहस्य
तुम्हारे कानों में
नरम गूदेदार गेंदें तुम्हें सहज महसूस करवाने के लिए
मातृभूमियों के नक़्शे जिन्हें तुम तय करके
अपनी जेब में रख लेते हो
जब तुम निकलते हो
अपने रास्ते की ओर

बीस

मैं ख़ौफ़ज़दा हूँ
उस भूले हुए गीत की धुन से
जो तब गाया जाता था
जब दो हाथ बाँधते थे मेरे जूते के फ़ीतों को
रिबन की शक्ल में
और स्कूल छोड़ते वक़्त लहराते हुए कहते थे विदा

इक्कीस

अगर फ़ोटोकॉपी हो पाती
उस पल की जब हम मिले थे
तब मुझे वह खचाखच भरा हुआ मिलता
दिनों और रात्रियों से

बाईस

वह नहीं भूलेगा सुदूर के किसी बच्चे को
जो शहर खुले रखता है अपने किवाड़
राहगीरों
पर्यटकों और आक्रमणकारियों के लिए

तेईस

चाँद दुनिया के दूसरी तरफ़ जा रहा है
मेरे प्रियजनों को पुकारने

चौबीस

मौसम बदलते हैं
रंग और तुम आते-जाते रहते हो
क्या रंग है तुम्हारे प्रस्थान का

दुन्या मिखाइल (जन्म : 1965) सुप्रसिद्ध इराक़ी-अमेरिकी कवयित्री हैं। यहाँ प्रस्तुत कविताएँ अँग्रेज़ी से हिंदी अनुवाद के लिए ‘पोएट्री’ के मई-2019 अंक से ली गई हैं। राहुल तोमर हिंदी कवि-अनुवादक हैं। वह इंदौर में रहते हैं। उनसे [email protected] पर बात की जा सकती है। यह प्रस्तुति ‘सदानीरा’ के 23वें अंक में पूर्व-प्रकाशित।

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