विस्वावा शिम्बोर्स्का की कविताएँ ::
अँग्रेज़ी से अनुवाद : रंजना मिश्र

विस्वावा शिम्बोर्स्का

हाथ

सत्ताईस हड्डियाँ
पैंतीस मांसपेशियाँ
पाँचों उँगलियों की पोरों में
क़रीब दो हज़ार तंत्रिका कोशिकाएँ
यह काफ़ी से भी ज़्यादा हैं
‘मीन कैम्फ़’1जर्मनी के तानाशाह और पूर्व चांसलर एडोल्फ़ हिटलर द्वारा लिखित एक पुस्तक जिसमें उसकी आत्मकथा के साथ-साथ उसकी राजनीतिक विचारधारा और जर्मनी के बारे में उसकी योजनाओं का वर्णन है। या
‘पूह कॉर्नर’2बच्चों के लिए बनी डिज्नी सीरीज। लिखने के लिए ।

स्मृतियों के साथ कठिन जीवन

अपनी स्मृतियों के लिए मैं बुरी श्रोता हूँ
वे चाहती हैं कि मैं लगातार उनकी आवाज़ सुनूँ
पर मैं ऊब से कसमसाने लगती हूँ
गुलगपाड़ा मचाने लगती हूँ
सुनती हूँ और बाहर नहीं आती
आती हूँ फिर लौट जाती हूँ

वह मेरा पूरा समय और तवज्जोह चाहती है
मेरी नींद पर उसे कोई आपत्ति नहीं
पर दिन एक दूसरा विषय है
जो उसे नाराज़ कर देता है
पुराने ख़तों से आक्रमण करती है वह
उत्सुकता से भरकर पुरानी तस्वीरें फेंकती है मेरी ओर
महत्त्वपूर्ण और अमहत्त्वपूर्ण घटनाओं को छेड़ती
मेरी दृष्टि भर देती है अनदेखे दृश्यों और
सगे मृतकों से
उसकी कहानियों में मैं चिरयुवा हूँ
यह बढ़िया है, पर हमेशा एक ही कहानी क्यों
हर आईने के पास मेरे लिए अलग समाचार है
जब मैं अपने कंधे उचका देती हूँ, वह नाराज़ हो जाती है
भारी-भरकम, पर आसानी से अनदेखी की जाने लायक़
पुरानी ग़लतियाँ चीख़ते हुए वह मुझसे बदला लेती हैं
मेरी आँखों में प्रतिक्रिया देखती

मुझे दिलासा देती है, यह और बुरा हो सकता था
वह चाहती है मैं सिर्फ़ उसके लिए और उसके साथ जिऊँ
आदर्शतः एक अँधेरे बंद कमरे में
मेरी योजनाओं में, फिर भी, आज का सूरज है
बनते हुए बादल और लंबी सड़कें
कभी-कभी मैं उससे ऊब जाती हूँ
मैं अलगाव की पेशकश करती हूँ, वर्तमान से अनंत तक।
तब वह करुणा से मुझे देख मुस्कुराती है
क्योंकि वह जानती है यह मेरा भी अंत होगा।

नीतिकथा

कुछ मछुआरों ने गहराई से एक बोतल ढूँढ़ निकाली। कागज़ का एक टुकड़ा उसके भीतर था
जिसमें लिखा था, ‘‘कोई मुझे बचाओ, मैं यहाँ हूँ। समुद्र ने मुझे इस सूखे रेगिस्तान में ला
छोड़ा है। मैं किनारे पर खड़ा हूँ, मदद की प्रतीक्षा में, जल्दी करो, मैं यहाँ हूँ।’’

‘‘कोई तारीख़ नहीं लिखी है, मुझे लगता है अब बहुत देर हो चुकी, यह वर्षों से तैरता रहा
होगा।‘’ पहले मछुआरे ने कहा।

‘‘और यह भी पता नहीं चलता कि कहाँ? कौन-सा समुद्र यह भी समझ नहीं आता।‘’ दूसरे
मछुआरे ने कहा।

‘‘अभी बहुत देर नहीं हुई है और दूरी भी अधिक नहीं, यहाँ जो द्वीप है वह हर जगह है।‘’ तीसरे
मछुआरे ने कहा।

वे सभी अजीब महसूस करने लगे, कोई कुछ नहीं बोला।

सच्चाइयों के साथ भी यही बात होती है।

यूनानी मूर्ति

लोगों और अन्य घटकों की मदद से
समय ने ख़ास बुरा बर्ताव नहीं किया उसके साथ
पहले उसकी नाक हटाई फिर गुप्तांग
इसके बाद एक-एक कर पैरों और हाथ की उँगलियाँ
कई वर्षों में हाथ, एक के बाद एक
बाईं जाँघ, फिर दाहिनी
कंधे, कमर, सिर और चूतड़
और तब से जो कुछ भी टुकड़ों में गिरा
वह मलबे से कंकड़ से धूल में बदल गया
जब कोई जीवित इस तरह मरता है
हर आघात से रक्त फूट निकलता है
पर संगमरमर के बुत धवल और
पूरी तरह नहीं मरते हमेशा
ऊपर जिसकी चर्चा की गई उसका सिर्फ़ धड़ बचा रहा
यह बड़ी मुश्किल से रोकी गई साँस-सा था
क्योंकि अब इसे
वह गरिमा और गंभीरता बचाए रखनी थी
जो खो गया था
फ़ौरी समय के लिए यह किया उसने
चकाचौंध करता
सहता

सहता हुआ
चकाचौंध करता
समय भी इसी तरह थोड़ी प्रशंसा का हक़दार है
क्योंकि उसने जल्दी ही काम रोक दिया
और थोड़ा बाद के लिए छोड़ दिया।

अपनी कविता से

सबसे अच्छी स्थिति
तुम्हें, मेरी कविता, ध्यान से पढ़ा जाएगा
चर्चा की जाएगी, तुम्हें याद किया जाएगा
बुरे से बुरा होगा
अगर सिर्फ़ पढ़ा जाएगा
तीसरी संभावना है
तुम्हें लिखने के तुरंत बाद
कूड़ेदान में उछाल दिया जाएगा
चौथी और आखिरी संभावना—
तुम अलिखित बच निकलोगी
ख़ुद की ख़ातिर, कुछ गुनगुनाती हुई।

सांत्वना

डार्विन,
वे कहते हैं, सुस्ताने के लिए उपन्यास पढ़ा करता था
पर सिर्फ़ ख़ास क़िस्म के
ऐसे नहीं जो दुखों पर ख़त्म होते
अगर ऐसा कुछ उसे मिल जाता
तो ग़ुस्से-से, किताब वह आग में झोंक देता
क्या पता सच या नहीं
पर मैं इसे सच मान सकती हूँ
अपने दिमाग़ में इतनी बार और इतनी जगहें सूक्ष्मता से जाँचते-परखते
काफ़ी से ज़्यादा बार उसने कई नस्लों को मरते देखा होगा
शक्तिहीन पर शक्तिशाली की विजय
बचे रहने का अंतहीन संघर्ष
हर कोई अभिशप्त जल्दी या देर से
कहानियों केसुंदर अंत पर उसका हक़ था
कम से कम कहानियों में ही सही आशा की किरण
अपने सूक्ष्मानुपातों में
प्रेमियों का पुनर्मिलन, परिवारों में मेल-मिलाप
संदेहों का छँटना, वफ़ादारी का इनाम
ऐश्वर्य का पुनरागमन, छिपे ख़ज़ाने का मिलना
बदलते मग़रूर पड़ोसी
सुयश की वापसी, बौने होते लालच
सही पात्रों से ब्याही जातीं उम्रदराज़ कुँवारियाँ
दूसरे गोलार्ध पर निर्वासित उपद्रवी
सीढ़ियों से लुढ़कते जालसाज़

विवाह की वेदी तक तेज़ी से चलकर जाते झाँसेबाज़
अनाथों को ठिकाना और विधवाओं को दिलासा
नम्र होता अहंकार, भरते घाव
घर बुलाए जाते ख़र्चीले बेटे
समंदर में उछाले जाते दुखों के प्याले
मिलन के आँसुओं से भीगे रूमाल
हँसी-ख़ुशी और समारोह
और फिडो, वह कुत्ता
जो पहले अध्याय में
रास्ता भटककर कहीं चला गया था
ख़ुशी से भौंकता
वापस चला आए
आख़िरी में।

बूढ़ा प्रोफ़ेसर

मैंने उससे पुराने दिनों के बारे पूछा
जब हम अब भी बहुत जवान थे
सरल, गर्ममिजाज़, बेवक़ूफ़ और कच्चे
इनमें से कुछ अब भी बचा हुआ है
सिवा जवानी के
उसने जवाब दिया
मैंने उससे पूछा क्या वह अब पक्के तौर पर जानता है
मानवता के लिए अच्छा और बुरा क्या है
सबसे घातक है भ्रम
उसने जवाब दिया
मैंने भविष्य के बारे पूछा
क्या वह अब उसे स्पष्ट देख सकता है
मैंने इतिहास की बहुत-सी किताबें पढ़ीं
उसने जवाब में कहा
मैंने मेज़ पर रखी, मढ़ी हुई
तस्वीर के बारे पूछा
अभी थे अभी नहीं।
भाई, रिश्तेदार, भावज
मेरी पत्नी, उसकी गोद में मेरी बेटी
बेटी की बाँहों में बिल्ली

फूलता चेरी का पेड़ और उसके ऊपर
उड़ती एक अनजान चिड़िया—
उसने कहा
मैंने पूछा क्या वह कभी ख़ुश होता है
मैं काम करता हूँ
उसने जवाब दिया
मैंने दोस्तों के बारे पूछा, क्या वे अब भी हैं।
कुछ पुराने सहायक,
जिनके अपने पुराने सहायक हैं
लुदमिला जो घर की देख-रेख करती है
बहुत क़रीब पर बहुत दूर
पुस्तकालय की दो स्त्रियाँ, मुस्कुराती हुईं
छोटी-सी ग्रेस हॉल के दूसरी तरफ़ और मार्कस ऑरेलियस
उसने जवाब दिया
मैंने उसके स्वास्थ्य के बारे पूछा, उसकी मनःस्थिति के बारे
वे मुझे कॉफ़ी, वोदका, सिगरेट नहीं देते
भारी यादें और चीज़ें नहीं उठाने देते
मैं न सुनाई देने का दिखावा करता हूँ
उसने जवाब दिया
मैंने बाग़ और बाग़ वाली बेंच के बारे पूछा
निरभ्र रातों में मैं आकाश देखा करता हूँ।
यह कभी काफ़ी नहीं होता
कितने सारे दृष्टिकोण
उसने जवाब दिया।

हत्यारे

वे कई दिनों तक सोचते हैं
मारने के लिए आख़िर किस तरह मारना चाहिए
और कितने मृतक काफ़ी मृतक होंगे।
इसके सिवा वे चाव से अपना भोजन करते
प्रार्थना करते, पैरों को धोते, चिड़ियों को दाना डालते
अपनी काँख खुजाते टेलीफ़ोन करते
दबाकर अपनी कटी ऊँगली का ख़ून बंद करते

अगर वे औरतें हों तो सैनिटरी नैपकिन
नेत्र प्रसाधन और फूलदान के लिए फूल खरीदतीं

ख़ुशनुमा दिनों में वे मज़ाक़ करते
फ्रिज़ से निकालकर संतरे का रस पीते
रात को चाँद और तारे देखते
अपने कानों में हेडफ़ोन लगा मधुर संगीत का मज़ा लेते
और भोर होने तक प्यारी नींद सोते हैं
जो वे सोच रहे हों
वह अगर रात में करना हो तो बात दूसरी है।

वर्ष 1996 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित विस्वावा शिम्बोर्स्का (2 जुलाई 1923-1 फ़रवरी 2012) पोलिश कवयित्री-लेखिका हैं। यहाँ प्रस्तुत कविताएँ अँग्रेज़ी से हिंदी अनुवाद के लिए Map : Collected and Last Poems by Wisława Szymborska से चुनी गई हैं। रंजना मिश्र हिंदी कवयित्री और अनुवादक हैं। उनसे और परिचय तथा ‘सदानीरा’ पर इस प्रस्तुति से पूर्व उनके काम-काज के लिए यहाँ देखें : पुरानी तस्वीरों में प्यार? प्यार सुबह की धुंध सरीखा हैमृत न होना ज़िंदा होना नहीं हैऔरत की ज़िंदगी एक चाबुक की मार का जवाब है

1 Comment

  1. प्रभात मिलिंद जुलाई 31, 2020 at 6:30 पूर्वाह्न

    अनुवाद दुरूह काम है। कविताओं का अनुवाद उससे भी मुश्किल। और, शिम्बोर्स्का जैसी कवियों की कविताओं का अनुवाद अन्य कविताओं के मुकाबले कहीं अधिक चुनौतियों से भरा काम है। इनमें दो-एक कविताएँ वाल पर पढ़ी हैं मैंने। संप्रेषण के अर्थ में बहुत सजग अनुवाद है, और भाषा की दृष्टि से बहुत चुस्त और प्रवाहयुक्त। कविताओं का चयन भी सुचिंतित है। प्रकाशन की बधाई, लेकिन अनुवादकर्ता और पाठकों की रचनात्मक तृप्ति का कहीं अधिक महत्व है।

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