रामस्वरूप किसान की कविताएँ ::
राजस्थानी से अनुवाद : राजेंद्र देथा

rajasthani poet ramswaroop kisan
रामस्वरूप किसान

पशु

पशुओं का पेशाब-गोबर
बुहारता है आदमी
क्यूँकि उनके न हाथ है न दिमाग़

आदमी का मल-मूत्र
बुहारता है आदमी
क्यूँकि दिमाग़ और हाथवाले पशु
यहाँ बहुसंख्यक हैं।

तुम पर कविता

आप हमारे पर कविता लिखिए
पुरस्कार मिलेगा!

तुम्हारे पर?

तुम्हारे पर कविता
जम नहीं सकती
इस चिकने शरीर पर
शब्द ठहर नहीं सकते

कविता जमती है
भुरभुरी ज़मीन पर
फटे हाथों पर और
बिवाईमय पैरों पर

तुम पर कविता
बनेगी नहीं!

कविता

मेरे साथ विधाता ने
अलग ही कर रखी है
कि मैं कमरे में बैठकर कविता नहीं कर सकता

मैं तो सूड़ करता या
लावणी में लगे हुए ही
कर सकता हूँ कविता

मेरे अंदर तो हड्डियाँ तोड़ कर
पसीने के रास्ते ही निकलती है कविता
लोग पूछते हैं अक्सर मुझसे—

खेती करते हुए
कैसे बचा लेते हैं
समय कविता के लिए

मैं कहता हूँ—

गए हुए बासी वक़्त को
मेरी गर्वीली कविता पसंद नहीं करती
यह तो उस उष्ण समय को ही खाना चाहती है
जो मेरा किसान कर्म खाता है।

मैं अन्नदाता नहीं हूँ

मैं अन्नदाता नहीं हूँ
मेरे नाम के आगे
लगाया गया आपका यह
अलंकार वापिस करता हूँ।

दाता तो आप हैं!

सभी प्रकार के दाता
मसलन मौत के दाता,
जीवन के दाता!

मैं तो मौत और जीवन के बीच
पिसने वाली चीज़ हूँ।

मेरे मार्फ़त भुरभुरी ज़मीन पर
तैयार की गई डोळियों में तो
कर्जा ही उगता आया है
अन्न तो आपके संगमरमरी महलों में ही उगता है साहिब!

दाता तो आप हो!
और अन्न मसखरा होता है,
इसीलिए इस वर्ष आपने मेरे साथ
बड़ी अच्छी मसखरी की है कि
आपने मेरा ऋण माफ़ कर दिया!

आप दाता हो!
आप तो इससे भी
भयानक मसखरी कर सकते हो मसलन—
अपने शरीर की रखवाली में मरने वाले की लाश पर
शहीदी चिट लगाकर उसकी जोड़ायत की आँखों से ढलते आँसुओं को
वहीं के वहीं स्थिर कर सकते हो।

स्थिर कर सकते हो आप
हमारे फेफड़ों में पहुँचती ऑक्सीजन को
गर मैं अपने खेत की डोळियों में
अन्न उगाने की कोशिश करूँ!

साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित रामस्वरूप किसान (जन्म : 1952) राजस्थानी के समादृत कवि हैं। वह किसान हैं और हनुमानगढ़ (राजस्थान) में रहते हैं। यहाँ प्रस्तुत कविताएँ राजस्थानी से हिंदी अनुवाद के लिए उनके कविता-संग्रह ‘आ बैठ बात करां’ से चुनी गई हैं। राजेंद्र देथा राजस्थानी तथा हिंदी साहित्य की नई पीढ़ी से संबद्ध हैं और जयपुर में रहते हैं। उनसे [email protected] पर बात की जा सकती है।

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