नव वर्ष

दुन्या मिखाइल की कविता :: अनुवाद : राहुल तोमर नव वर्ष एक द्वार पर दस्तक हुई अफ़सोस यह नव वर्ष है तुम नहीं। दो मैं नहीं जानती कि कैसे जोड़ूँ तुम्हारी अनुपस्थिति को अपने जीवन में मैं नहीं जानती कि कैसे घटाऊँ स्वयं को उससे मैं नहीं जानती कि कैसे विभाजन करूँ उसका— प्रयोगशाला की कुप्पियों में। तीन समय ठहर गया बारह बजे और परेशान … Continue reading नव वर्ष